July 27, 2013

आखिर हिन्दी में दिलचस्पी की कमी क्यों

जैसे मैंने पहले भी कहा है, हालांकि हिन्दी दुनिया की सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषाओं में से एक है, पर इस भाषा में दुनिया भर में बहुत दिलचस्पी नहीं है. मेरे जैसे उन लोगों के लिए यह निराशा की बात तो है जिन्हें हिन्दी में दिलचस्पी है, लेकिन बड़ी आश्चर्य की बात नहीं है. हिन्दी की तुलना में लोग अधिकतर यूरोपीय भाषाओं से अधिक परिचित होते हैं.

हालांकि, लोग दुनियाभर में भारतीय संस्कृति से परिचित हैं. योग, बॉलीवुड, हिन्दुस्तानी खाना, और हिन्दू धर्म भी बहुत लोकप्रिय है. लेकिन इन सब वस्तुओं के प्रति दिलचस्पी होने के बावजूद, जनता की हिन्दी के प्रति दिलचस्पी नहीं बढ़ी है. संस्कृति में दिलचस्पी भाषा में दिलचस्पी अब तक प्रोत्साहित नहीं कर पाई है.

अमेरिका में जनता हिन्दी के बारे में अनजान है. लोग अक्सर मुझसे पूछते हैं कि क्या आपकी बीवीहिन्दूबोलती है.

मेरे अनुभव में जिन लोगों की हिन्दी में दिलचस्पी होती है, उनकी दिलचस्पी बहुत अगंभीर होती है. दरअसल ऐसे लोगों की बॉलीवुड या योग आदि में दिलचस्पी है. वेनमस्तेके अलावा कुछ नहीं सीखना चाहते.

लेकिन ऐसे लोगों की आलोचना करने की मंशा से मैं ये सब बातें नहीं लिख रहा हूं. मुझे बस थोड़ी निराशा हुई क्यूंकि मैंने हिंदी सिखाने का बहुत प्रयास किया है पर कम लोगों ने मेरे प्रयास पर ध्यान दिया है, जबकि दूसरी वेबसाइटें जिन्होंने इतना प्रयास नहीं किया है, उन्हें बहुत ध्यान मिला है. जब मैंने कारण सोचा, तो मुझे यह पता चला कि इसका कारन यह होगा कि मेरी वेबसाइट दूसरी वेबसाइटों की अपेक्षा अधिक गंभीर है, और अधिकतर लोगों की ऐसी गंभीरता में कोई रूचि नहीं है.

इस वेबसाइट पर सब लोगों का स्वागत है, उनकी हिंदी में दिलचस्पी चाहे कितनी भी क्यों न हो.

लेकिन काश कि और लोगों की हिंदी में गंभीर रूचि होती.